Dataset Preview
Duplicate
The full dataset viewer is not available (click to read why). Only showing a preview of the rows.
The dataset generation failed
Error code:   DatasetGenerationError
Exception:    IndexError
Message:      list index out of range
Traceback:    Traceback (most recent call last):
                File "/usr/local/lib/python3.14/site-packages/datasets/builder.py", line 1859, in _prepare_split_single
                  original_shard_lengths[original_shard_id] += len(table)
                  ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
              IndexError: list index out of range
              
              The above exception was the direct cause of the following exception:
              
              Traceback (most recent call last):
                File "/src/services/worker/src/worker/job_runners/config/parquet_and_info.py", line 1369, in compute_config_parquet_and_info_response
                  parquet_operations, partial, estimated_dataset_info = stream_convert_to_parquet(
                                                                        ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~^
                      builder, max_dataset_size_bytes=max_dataset_size_bytes
                      ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
                  )
                  ^
                File "/src/services/worker/src/worker/job_runners/config/parquet_and_info.py", line 948, in stream_convert_to_parquet
                  builder._prepare_split(split_generator=splits_generators[split], file_format="parquet")
                  ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
                File "/usr/local/lib/python3.14/site-packages/datasets/builder.py", line 1694, in _prepare_split
                  for job_id, done, content in self._prepare_split_single(
                                               ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~^
                      gen_kwargs=gen_kwargs, job_id=job_id, **_prepare_split_args
                      ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
                  ):
                  ^
                File "/usr/local/lib/python3.14/site-packages/datasets/builder.py", line 1880, in _prepare_split_single
                  raise DatasetGenerationError("An error occurred while generating the dataset") from e
              datasets.exceptions.DatasetGenerationError: An error occurred while generating the dataset

Need help to make the dataset viewer work? Make sure to review how to configure the dataset viewer, and open a discussion for direct support.

text
string
वर्तमान समय में मंगल ग्रह पर स्थित सारा जल, बर्फ के रूप में है। थोडी मात्रा में जल, वाष्प के रूप में भी है। कहीँ-कहीं थोड़ी मात्रा में जल, द्रव रूप में मंगल की भूमि में भी है।
सुधनोती आज़ाद कश्मीर का एक ज़िला है। सन् 1995 तक यह पुंछ ज़िले की एक तहसील हुआ करता था लेकिन उस वर्ष में इसे अलग करके ज़िले का दर्जा दे दिया गया। इस ज़िले की राजधानी पलन्द्री है।
इस ज़िले के लोग अधिकतर पंजाबी की उपभाषाएँ बोलते हैं। यहाँ सुधन और आवान नामक पंजाबी समुदायों का ज़ोर है और इस ज़िले का नाम भी सुधन लोगों पर पड़ा है।
सुधनोती ज़िले में तीन तहसीलें हैं - पलन्द्री, मांग और त्रारख़ाल।
निर्देशांक: 25°06′N 85°54′E / 25.10°N 85.90°E / 25.10; 85.90
सिरखिन्डी हलसी, लखीसराय, बिहार स्थित एक गाँव है।
सिरखिण्डी प्राचीन गांव में से एक है। इस गांव से दक्षिण दिशा 02.50 किलोमीटर सिकान्दरा शेखपुरा रोड को जोड़ता है।उत्तर दिशा चेवाङा बिल्लो रोड को जोड़ता है। ये सिरखिण्डी गांव में जमींदारों के प्राचीन कचहरी स्थित है। यहां तीन शिव मंदिर, एक राम मंदिर यज्ञशाला, एक महारानी स्थान, एक बाबा विश्वकर्मा मंदिर, एक हनुमान मंदिर, एक ...
बालती एक तिब्बताई भाषा है जो पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र और भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के करगिल क्षेत्र में बोली जाती है। यह आधुनिक तिब्बती भाषा से काफ़ी भिन्न है। पुरानी तिब्बती की कई ध्वनियाँ जो आधुनिक तिब्बती में खोई जा चुकी हैं, आज भी बलती में प्रयोग होती हैं।
निर्देशांक: 27°13′N 79°30′E / 27.22°N 79.50°E / 27.22; 79.50
बंधा नगरिया छिबरामऊ, कन्नौज, उत्तर प्रदेश स्थित एक गाँव है।
मालती बेडेकर एक भारतीय मराठी लेखिका थीं। वह मराठी साहित्य में पहली प्रमुख नारीवादी लेखिका के रूप में जानी जाती हैं। बालुताई खरे उनके मायके का नाम था। वे अनंतराव और इंदिराबाई खरे की बेटी थी। उनकी 1938 में विश्राम बेडेकर से मुलाकात हुई और शादी भी, तत्पश्चात उन्होने अपना नाम मालती विश्राम बेडेकर रख लिया।
पिन्डवाली, गैरसैण तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत गढ़वाल मण्डल के चमोली जिले का एक गाँव है।
मकराना भारतीय राज्य राजस्थान की नगर परिषद एवं तहसील है। इस तहसील में 136 से अधिक गाँव शामिल हैं, और इस प्रकार यह नागौर जिले की सबसे बड़ी तहसील है। मकराना यहाँ के श्वेत पत्थर और संगमरमर के लिए प्रसिद्ध है। मकराना के संगमरमर का उपयोग ताजमहल के निर्माण में किया गया था। मकराना बड़ा कस्बा है, जिसमें विभिन्न स्थानों पर संगमर...
यूनान के इतिहास से आशय आधुनिक यूनान के अन्दर आने वाले क्षेत्रों का इतिहास से होने के अलावा इसका आशय यूनानी लोगों तथा उनके द्वारा शासित प्रदेशों के इतिहास से है। यूनानी लोगों के वास का क्षेत्र अलग-अलग काल में भिन्न-भिन्न रहा है, इस कारण यूनान का इतिहास भी इस मामले में परिवर्ती है कि किस युग में किस क्षेत्र क्षेत्र को 'य...
यूनान की मुख्य भूमि और उसके द्वीप लगभग 4000 वर्ष ईसा पूर्व बस चुके थे। ई.पू. दूसरी सहस्त्राब्दी तक ईजियाई सभ्यता थी जहाँ से लोगों के मिस्र और एशिया माइनर से संबंध सुगम थे। लगभग 17वीं शताब्दी ई.पू. में बाल्कन क्षेत्र की ओर से ग्रीस और पेलोपोनसस्‌ पर आक्रमण हुए। सभी आक्रमणकारी जातियाँ- एकियाई, आर्केडी, इपोलियन, अपोली और ...
1000-499 ई.पू. में मुख्य रूप से ग्रीक नगर-राज्यों की स्थापना हुई और जातिभेद चेतना का प्रादुर्भाव हुआ। प्रांरभिक हेलेनिक राज्यों का शासन राजाओं द्वारा होता था। शनै: शनै: राजतंत्र में परिवर्तित हुआ। कुलीनतंत्र में राजनीतिक समानता प्राय: नहीं थी। लगभग 650 ई.पू. में सामाजिक और राजनतिक संघर्षों ने इस कुलीन तंत्र को उखाड़ फे...
500 ई.पू. तक स्पार्टा और एथेंस ग्रीस के दो बड़े नगरराज्य बने। स्पार्टा का शासन प्राचीन परिपाटीवाले कुलीनों के हाथ में था। एथेंस के शासक मध्यवर्गीय और प्रजातांत्रिक थे। ई.पू. 7वीं शताब्दी तक स्पार्टा में संस्कृति, काव्य और कला की प्रचुर उन्नति हुई, किंतु वहाँ की शासनपद्धति अत्यंत कठोर थी। शिशु के उत्पन्न होते ही, राज्य ...
ई.पू. 683 में एथेंस से राजतंत्र का समूलोच्छेदन हुआ। 'सोलन पिसिस्ट्राटस' ने कुछ सीमा तक जनमत का सम्मान किया, इसके बाद इसागोरस और क्लेइस्थेनीज के नेतृत्व में संघर्ष के बाद जनतांत्रिक पद्धति की विजय हुई। स्पार्टा ने एथेंस के प्रजातंत्र को उखाड़ फेंकने के अनेक प्रयत्न किए, किंतु एथेंस ज्यों का त्यों रहा।
499-638 ई.पू. में फारस से युद्ध और नगरराज्यों में परस्पर संघर्ष आदि प्रमुख घटनाएँ हुईं। ग्रीस के कई नगरराज्यों ने इस स्थिति में अपना स्थान बहुत प्रभावशाली बना लिया।
एशिया माइनर और कुछ द्वीपों के नगर लीडिया के सम्राट् क्रिसस के प्रभाव में आ गए थे। वह हेलेनिक संस्कृति का पोषक और एक उदार शासक था। उसने नगरवासियों की आर्थिक और बौद्धिक उन्नति में योग दिया। 546 ई.पू. में फारस के तत्कालीन भ्रासट साइरस ने क्रिसस के अधिकार से सारे ग्रीक नगर छीन लिए। 512 ई.पू. में उसका उत्तराधिकारी दारायुश ए...
लगभग 480 ई.पू. में पारसी सम्राट् जरक्सीज ने पुन: ग्रीस पर आक्रमण किया। एथंस, स्पार्टा और पेलोपोनेशियाई संघ के संयुक्त प्रतिरोध के बावजूद भी ग्रीस हार गया। किंतु ग्रीस की जलसेना से फारस की सेनाओं को पीछे लौटने को बाध्य किया। एक वर्ष पश्चात्‌ 479 ई.पू. में ग्रीकों ने प्रत्याक्रमणकर फारस की सारी सेनाओं को पीछ्र खदेड़ दिया...
इस समय तक एथेंस नगर ग्रीक सभ्यता का केंद्र बन चुका था। आयोनी ग्रीकों ने स्पार्टा के अधिकार से मुक्त होकर एथेंस का नेतृत्व स्वीकार किया। 461 ई.पू. में पेरिक्लीज ने जनतंत्र को बढ़ावा दिया। किंतु यह जनतंत्र भी मूल यूनानी जनता के लिये सीमित था। शेष लोग दासों की कोटि में रखे जाते थे। पेरिक्लीज के नेतृत्वकाल में एथेंस की राज...
स्पार्टा और एथेंस के विचारों में बहुत भेद था। एथेंस मूलत: व्यापारिक शक्तिसंचय की प्रवृत्तिवाला उपनिवेशवादीसाम्राज्यवादी राज्य था और स्पार्टा ग्रीस के सभी नगरराज्यों का राजनीतिक नेतृत्व चाहता था। फलत: नेतृत्व के लिये इन दोनों तथा इनसे सबंधित नगरराज्यों में युद्ध छिड़ गया। युद्ध 10 वर्ष से भी अधिक समय तक चला। दोनों ओर धन...
युद्ध और अशांति के वातावरण में भी ई.पू. 5वीं शताब्दी में एथेंस के नेतृत्व में ग्रीस में कला और साहित्य की प्रशंसनीय उन्नति हुई। पाथेंनान, प्रोलिया और हेफिस्टस के मंदिर आदि समृद्ध वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने उसी युग में प्रस्तुत हुए। फिदियस, मिरन और पॉलीक्ट्सि आदि प्रसिद्ध वास्तुकलाकार थे। चिकित्साजगत्‌ में हिपाक्रिटस क...
प्राचीन ग्रीस के इतिहास में, मुख्यत: एथेंस के इतिहास में दासप्रथा उल्लेखनीय है। इस संदर्भ में प्रजातांत्रिक पद्धति और दूसरी शासनपद्धतियों में विशेष भेद नहीं था। वर्तमान राजनीतिक सिद्धांत में 'श्रम के महत्व' को मुख्य स्थान प्राप्त हैं। प्राचीन सिद्धान्तों में 'श्रम' राजनीतिक अधिकारों की अयोग्यता का परिचायक था। कृछ काल त...
इसी समय उत्तर ग्रीस में मकदूनिया नाम का एक शक्तिशाली राज्य उभर रहा था। ई.पू. 359 में फिलिप वहाँ का सम्राट् हुआ । अन्य ग्रीकी नगरराज्यों से मकदूनिया विजयी हुआ। कोरिंथ और थीबीज सैनिक अड्डे बन गए। फिलिपकी हत्या के बाद उसका पुत्र सिकंदर महान्‌ मकदूनिया का सम्राट् हुआ।
सिकंदर ने सारे बिखरे हुए ग्रीस को अपने झंडे के नीचे एकत्र कर लिया यह अन्य राज्यों की जीतता हुआ पंजाब आकर लौट गया। 323 ई.पू. में बैबिलोन में उसी मृत्यु हुई। वह संपूर्ण विश्व में एक राज्य और एक संस्कृति देखने का इच्छुक था। पर सिकंदर की मृत्यु पर उसका विस्तृत साम्राज्य छिन्न भिन्न हो गया। संघर्षो की लंबी श्रृखंला में तीन ...
रोम ने ग्रीस और मकदूनिया पर आधिपत्य के साथ सिकंदर द्वारा विजित पूर्वी प्रदेशों पर भी अधिकार जमा लिया। एथेंस में कला और संस्कृति की उन्नति रोमनों के काल में ज्यों की त्यों रही। जस्तिनियन ने एथेंस के बौद्धिक उन्नयन में हस्तक्षेप कर सिकंदरिया को दार्शनिक शिक्षाओं का केंद्र बनाया। इससे रोम ने भी ग्रीस कला और संस्कृति से बह...
यह राज्य नौकरशाही से आरंभ हुआ। इस साम्राज्य का पूरा इतिहास, अपनी रक्षा के लिये बाल्कन, दक्षिणी इटली और एशिया माइनर से हुए युद्धों का इतिहास है। विजीगोथिक, गोथिक और बल्गोरियन जातियों के भी आक्रमण हुए। सम्राट् जस्तिनियन ने उस भूमि को पुन: प्राप्त करने का प्रयत्न किया। आगे चलकर धार्मिक मतभेदों के कारण सन्‌ 800 में, जबकि च...
फ्रांस की क्रांति और तुर्क शासन के क्रमिक पतन आदि की घटनाओं से और अन्य देशों में बसे ग्रीकी लोगों की समृद्धि से ग्रीस के नेताओं में तुर्कों से अपने देश को मुक्त कराने की इच्छा जगी। रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के उत्साहित करने पर वहाँ की जनता ने तुर्को के विरुद्ध सन्‌ 1821 से 1829 तक संघर्ष कर ग्रीस को एक स्वतंत्र राष्ट्र बन...
प्रथम विश्वयुद्ध में ग्रीस तटस्थ रहा। सम्राट् अलेक्जंडर की मृत्यु के बाद संसदीय निर्वाचन में बेनीजेलास दल की हार हुई। 1922 में सम्राट् कांस्टैंटिन ने एशिया माइनर के अल्पसंख्यक ग्रीक नगरों को मुक्त कराने के लिये टर्की के विरुद्ध युद्ध किया, किंतु पराजित हुआ। बाद में परस्पर नगरों की अदला बदली हो गई। बेनीजेलास दल के आंदोल...
द्वितीय विश्वयुद्ध के समय यहाँ भी राष्ट्रीय समाजवादी जर्मनी की तरह अधिनायकवाद था। दोनों विश्वयुद्धों के बीच ग्रीस बाल्कन राष्ट्रों में सहयोग के लिये सक्रिय था। 1930 में पहला बाल्कन सम्मेलन एथेंस में हुआ। 1940 में इटली को युद्धसंबंधी सुविधा न प्रदान करने पर इटली ने ग्रीस पर आक्रमण कर दिया। प्रारंभिक असफलताओं के बाद ग्री...
सन्‌ 1941 ओर उसके बाद ग्रीस में अनेक छोटे बड़े राजनीतिक संगठन हुए। इनमें बहुतों के पास कोई निश्चय कार्यक्रम नहीं था ब्रिटिश प्रतिनिधियों के साथ 1943 में राजनीतिक दलों के नेताओं ने तय किया कि स्वस्थ जनमत तैयार होने के पूर्व तक सत्ता के अधिकार के लिये सम्राट् की नियुक्ति होनी चाहिए। राजनीतिक संगठनों ने सम्राट् को अपना सह...
इस समय ग्रीस में औद्योगिक प्रगति कुछ अंशों में हुई, किंतु राजनीतिक और सामाजिक स्थिति निराशापूर्ण रही। सितंबर, 1947 से नवंबर, 1949 तक दस सरकारें बदलीं। पैपागस के नेतृत्व में रैली दल के बहुमत में आने पर कुछ जन अधिकारों में वृद्धि हुई और राजनीति में स्थिरता आई। संयुक्त राज्य अमरीका की सहायता में न्यूनता की गई। फिर भी देश ...
संक्षिप्त हिंदी शब्दसागर हिन्दी साहित्य की एक अमूल्य निधि है। यह हिन्दी शब्दकोश है। इसके लेखक/संपादक आचार्य रामचंद्र वर्मा हैं।
घाना का ध्वज घाना का राष्ट्रीय ध्वज है।
भोजनं में भारत के आन्ध्रप्रदेश राज्य के अन्तर्गत के कर्नूलु जिले का एक गाँव है।
शिल्पा शुक्ला हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं।
दिल्ली मे शिल्पा शुक्ला ने अस्मिता थिएटर ग्रुप के साथ अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत की और् सुप्रसिद्ध रंगमंच निर्देशक अरविन्द गौड़ के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त किया।
1-शिल्पा शुक्ला का नाट्य संस्था के साथ कार्य।
कफोलगांव तल्ला-चौ.3, थलीसैंण तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत गढ़वाल मण्डल के पौड़ी जिले का एक गाँव है।
बेरिंग ज़मीनी पुल या बेरिंजिया एक ज़मीनी पुल था जो एशिया के सुदूर पूर्वोत्तर के साइबेरिया क्षेत्र को उत्तर अमेरिका के सुदूर पश्चिमोत्तर अलास्का क्षेत्र से जोड़ता था। इस धरती के पट्टे की चौड़ाई उत्तर से दक्षिण तक लगभग 1,600 किमी थी यानि इसका क्षेत्रफल काफ़ी बड़ा था। पिछले हिमयुग के दौरान समुद्रों का बहुत सा पानी बर्फ़ क...
जब बेरिंजिया अस्तित्व में था तो क्षेत्रीय मौसम अनुकूल होने की वजह से यहाँ बर्फ़बारी कम होती थी और वातावरण मध्य एशिया के स्तेपी मैदानों जैसा था। इतिहासकारों का मानना है कि उस समय कुछ मानव समूह एशिया से आकर यहाँ बस गए। वह बेरिंजिया से आगे उत्तर अमेरिका में दाख़िल नहीं हो पाए क्योंकि आगे भीमकाय हिमानियाँ उनका रास्ता रोके ...
बेरिंजिया लगभग 4,000 किमी लम्बा और 1,600 किमी चौड़ा था। यह आधुनिक साइबेरिया की लेना नदी से लेकर कनाडा की मैकेन्ज़ी नदी तक पहुँचता था। इसका क्षेत्र इतना बड़ा था कि कुछ भूवैज्ञानिकों के अनुसार यह एक ज़मीनी पुल कम और एक उपमहाद्वीप ज़्यादा था। मैमथों के अवशेषों की हड्डियों में मौजूद कोलेजन पर अनुसंधान करके वैज्ञानिकों ने य...
बेरिंजिया एक बड़ा क्षेत्र था और इसका अधिकतर भाग हिमानियों से मुक्त था और इसके स्तेपी जैसे क्षेत्र पर बहुत से जानवर रहते थे। इसलिए कुछ हज़ार मानव भी यहाँ रह पाए। माना जाता है कि यह 5-17 हज़ार साल तक बेरिंजिया में रहे और दूसरे मानव समाजों से इनका कोई संपर्क नहीं था। कुछ इतिहासकारों का सोचना है कि एक ज़माने में बेरिंजियाई...
बेरिंजिया पर ऊँट, मैमथ, अमेरिकी सिंह, घोड़े, हिरण, भेड़, भेड़िया और स्तेपी भैंसे जैसे जानवर रहा करते थे। उत्तर अमेरिका में हाथी, बालदार गैंडा और सिंह अब विलुप्त हैं लेकिन वे इसी ज़मीनी पुल के ज़रिये एशिया से वहाँ पहुँचे। अध्ययन से यह भी ज्ञात हुआ है कि वास्तव में ऊँटों का वंश सबसे पहले उत्तर अमेरिका में शुरू हुआ था और ...
मशीन मिस्त्री उस व्यक्ति को कहते हैं जो मशीनी औजारों का उपयोग करके कलपुर्जे बनाता है या उनमें संशोधन करना है। वह प्रायः धातु के कलपुर्जे बनाता है। मशीन मिस्त्री के द्वारा किये जाने वाले कार्यों को मशीनिंग कहते हैं।
बारटोलोमीयु डियास जिसे बाथोलोमीयु डियास के नाम से भी जाना जाता है, एक पुर्तगाली अन्वेषक था और सर्वप्रथम यूरोपीय था जिसने केप ऑफ़ गुड होप से होते हुए समुद्र मार्ग से पूर्व की ओर यात्रा की।
सन् 1487 में, पुर्तगाल के महाराज किंग जॉन द्वितीय ने डियास को पूर्व में एक ईसाई राजा प्रैस्टर जॉन की धरती की खोज करने को कहा। क्योंकि प्रैस्टर जॉन वास्तव में कोई नहीं था, डियास को कोई धरती नहीं मिली लेकिन उसे 1488 में अटलांटिक महासागर से हिन्द महासागर होते हुए एशिया तक जाने का मार्ग अवश्य मिल गया। सन् 1500 में पैद्रो आ...
इस खोजयात्रा का एक अन्य उद्देश्य उन देशों में जाकर, जिनके बारे में जानकारी जोआओ अफोन्सो दि एवीरो जिनके साथ पुर्तगाली अच्छे संबंध चाहते थे। डियास को दक्षिण एशिया में व्यापार पर मुसलमानों के एकाधिकार को चुनैती देने के लिए भी भेजा गया था।
कैथलिक एन्साइक्लोपीडिया।
कोत्तपेट, खानापूर मण्डल में भारत के आन्ध्रप्रदेश राज्य के अन्तर्गत के अदिलाबादु जिले का एक गाँव है।
आलम बदी,भारत के उत्तर प्रदेश की सोलहवीं विधानसभा सभा में विधायक रहे। 2012 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश की निजामाबाद विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता।
वालपाराईसो, जिसे स्पेनी लहजे में बालपाराईसो उच्चारित किया जाता है, दक्षिण अमेरिका के चिली देश का एक प्रमुख शहर और बंदरगाह है। यह प्रशांत महासागर के पूर्वी तट पर स्थित है। यह चिली के वालपाराईसो प्रान्त और वालपाराईसो क्षेत्र दोनों की राजधानी भी है। यह चिली की राजधानी सांतिआगो से लगभग 112 किमी पूर्वोत्तर में स्थित है।
वेल्पारइसो शायद पहली बार पिकुंचेस भारतीयों द्वारा बसाया गया था जो कृषि के लिए समर्पित थे। स्पेनिश खोजकर्ता सान्तिअगुइयो, चिली के पहले यूरोपीय अन्वेषक, या आविष्कार माना जाता है, जो डिएगो डी अल्माग्रो द्वारा भेजे गए एक आपूर्ति जहाज पर सवार थे, 1536 में यहाँ आया। सान्तिअगुइयो क्वेंका के स्पेन में पैतृक गाँव वेल्पारइसो डी ...
वेल्पारइसो के स्वर्ण युग के दौरान शहर में मुख्य रूप से यूरोप से आप्रवासियों की बड़ी संख्या प्राप्त किया। आप्रवासी समुदायों शहर के उल्लेखनीय वास्तुकला पर एक अनूठी छाप छोड़ी. कई भी अन्य उल्लेखनीय सांस्कृतिक और आर्थिक संस्थानों की स्थापना की है, जबकि प्रत्येक समुदाय, अपने स्वयं के चर्चों और स्कूलों का निर्माण किया। सबसे ब...
20 वीं सदी की दूसरी छमाही के दौरान, वेल्पारइसो अमीर परिवारों ऐतिहासिक तिमाही डे gentrified के रूप में, 1990 के दशक तक हलचल सैंटियागो या आसपास विना डेल मार्च के लिए चलती है, एक महान गिरावट का अनुभव बहुत शहर के अद्वितीय विरासत से खो गया था और चिली के कई शहर पर दिया था। लेकिन 1990 के दशक में, एक घास की जड़ें संरक्षण आंदोल...
Severín's Public Library
El Mercurio de Valparaíso
Arco Británico
Monument to the Heroes of Iquique, Plaza Sotomayor
"प्रशांत का गहना" उपनाम, वेल्पारइसो अपने तात्कालिक शहरी डिजाइन और अद्वितीय वास्तुकला पर आधारित एक विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। 1996 में, विश्व स्मारक कोष रस्से से चलाया जानेवाला लिफ्ट के वेल्पारइसो की असामान्य प्रणाली दुनिया की 100 सबसे लुप्तप्राय ऐतिहासिक खजाने की घोषणा की।
बदाली, भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं।
2012 विश्व महिला कबड्डी प्रतियोगिता पटना, भारत मे 1 मार्च से 4 मार्च 2012 के बीच अयोजित हुई। यह महिलाओं की प्रथम विश्व स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता थी। इस प्रतियोगिता मे 16 देशो के कबड्डी दलों ने भाग लिया था। यह प्रतियोगिता भारत ने ईरान को हराकर जीती। यह प्रतियोगिता पटना के पाटलिपुत्र स्टेडियम में आयोजित की गई थी।
इस प्रतियोगिता मे 16 टीमों ने भाग लिया था जो इस प्रकार हैं:
असेटी, चौखुटिया तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के अल्मोड़ा जिले का एक गाँव है।
सिल्टोना N.Z.A., कोश्याँकुटोली तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के नैनीताल जिले का एक गाँव है।
सरकारी सेवाओं और संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले पिछड़े समुदायों तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों से सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए भारत सरकार ने अब भारतीय कानून के जरिये सरकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों की इकाइयों और धार्मिक/भाषाई अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को छोड़कर सभी सार्वजनिक त...
आम आबादी में उनकी संख्या के अनुपात के आधार पर उनके बहुत ही कम प्रतिनिधित्व को देखते हुए शैक्षणिक परिसरों और कार्यस्थलों में सामाजिक विविधता को बढ़ाने के लिए कुछ अभिज्ञेय समूहों के लिए प्रवेश मानदंड को नीचे किया गया है। कम-प्रतिनिधित्व समूहों की पहचान के लिए सबसे पुराना मानदंड जाति है। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्...
मूलभूत सिद्धांत यह है कि अभिज्ञेय समूहों का कम-प्रतिनिधित्व भारतीय जाति व्यवस्था की विरासत है। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के संविधान ने पहले के कुछ समूहों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया। संविधान निर्माताओं का मानना था कि जाति व्यवस्था के कारण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ऐ...
विंध्य के दक्षिण में प्रेसीडेंसी क्षेत्रों और रियासतों के एक बड़े क्षेत्र में पिछड़े वर्गो के लिए आजादी से बहुत पहले आरक्षण की शुरुआत हुई थी। महाराष्ट्र में कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति साहूजी महाराज ने 1902 में पिछड़े वर्ग से गरीबी दूर करने और राज्य प्रशासन में उन्हें उनकी हिस्सेदारी देने के लिए आरक्षण का प्रारम्भ किय...
देश भर में समान रूप से अस्पृश्यता की अवधारणा का अभ्यास नहीं हुआ करता था, इसलिए दलित वर्गों की पहचान कोई आसान काम नहीं है। इसके अलावा, अलगाव और अस्पृश्यता की प्रथा भारत के दक्षिणी भागों में अधिक प्रचलित रही और उत्तरी भारत में अधिक फैली हुई थी। एक अतिरिक्त जटिलता यह है कि कुछ जातियाँ/समुदाय जो एक प्रांत में अछूत माने जात...
पिछड़े वर्गों का आंदोलन भी सबसे पहले दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में जोर पकड़ा. देश के कुछ समाज सुधारकों के सतत प्रयासों से अगड़े वर्ग द्वारा अपने और अछूतों के बीच बनायी गयी दीवार पूरी तरह से ढह गयी; उन सुधारकों में शामिल हैं रेत्तामलई श्रीनिवास पेरियार, अयोथीदास पंडितर www.paraiyar.webs.com, ज्योतिबा फुले, बाबा साहे...
जाति व्यवस्था नामक सामाजिक वर्गीकरण के एक रूप के सदियों से चले आ रहे अभ्यास के परिणामस्वरूप भारत अनेक अंतर्विवाही समूहों, या जातियों और उपजातियों में विभाजित है। आरक्षण नीति के समर्थकों का कहना है कि परंपरागत रूप से चली आ रही जाति व्यवस्था में निचली जातियों के लिए घोर उत्पीड़न और अलगाव है और शिक्षा समेत उनकी विभिन्न तर...
मलाईदार परत को पहचानने के लिए विभिन्न मानदंडों की सिफारिश की गयी, जो इस प्रकार हैं:
साल में 250,000 रुपये से ऊपर की आय वाले परिवार को मलाईदार परत में शामिल किया जाना चाहिए और उसे आरक्षण कोटे से बाहर रखा गया। इसके अलावा, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड एकाउंटेंट, अभिनेता, सलाहकारों, मीडिया पेशेवरों, लेखकों, नौकरशाहों, कर्नल और समकक्ष रैंक या उससे ऊंचे पदों पर आसीन रक्षा विभाग के अधिकारियों, उच्च न्यायालय और...
भारतीय न्यायपालिका ने आरक्षण को जारी रखने के लिए कुछ निर्णय दिए हैं और इसे सही ढंग से लागू करने के लिए के कुछ निर्णय सुनाया है। आरक्षण संबंधी अदालत के अनेक निर्णयों को बाद में भारतीय संसद द्वारा संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से बदलाव लाया गया है। भारतीय न्यायपालिका के कुछ फैसलों का राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा उल्लंघन...
प्रासंगिक मामले
शब्द क्रीमी लेयर को पहली बार केरल राज्य बनाम एनएम थॉमस मामले में 1 9 75 में बनाया गया था जब एक न्यायाधीश ने कहा था कि "आरक्षण के लाभ पिछड़े वर्ग की शीर्ष मलाईदार परत से छीन जाएंगे, इस प्रकार कमज़ोरों में सबसे कमजोर और पूरे केक का उपभोग करने के लिए भाग्यशाली परतों को छोड़कर "। 1 99 2 में इंद्र सवनी बनाम भारतीय संघ के फै...
शैक्षिक संस्थानों और नौकरियों में सीटें विभिन्न मापदंड के आधार पर आरक्षित होती हैं। विशिष्ट समूह के सदस्यों के लिए सभी संभावित पदों को एक अनुपात में रखते हुए कोटा पद्धति को स्थापित किया जाता है। जो निर्दिष्ट समुदाय के तहत नहीं आते हैं, वे केवल शेष पदों के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, जबकि निर्दिष्ट समुदाय के सदस्य सभी...
केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा विभिन्न अनुपात में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ी जातियों के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं। यह जाति जन्म के आधार पर निर्धारित होती है और कभी भी बदली नहीं जा सकती. जबकि कोई व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन कर सकता है और उसकी आर्थिक स्थिति में उतार -चढ़ाव हो सकता है, लेकि...
केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित उच्च शिक्षा संस्थानों में उपलब्ध सीटों में से 22.5% अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए आरक्षित हैं . ओबीसी के लिए अतिरिक्त 27% आरक्षण को शामिल करके आरक्षण का यह प्रतिशत 49.5% तक बढ़ा दिया गया है 10. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में सीटें 14% अनुसूचित जातियों और 8% अनु...
जाति-समर्थक आरक्षण के पैरोकारों के अनुसार प्रबंधन कोटा सबसे विवादास्पद कोटा है।प्रमुख शिक्षाविदों द्वारा भी इसकी गंभीर आलोचना की गयी है क्योंकि जाति, नस्ल और धर्म पर ध्यान दिए बिना आर्थिक स्थिति के आधार पर यह कोटा है, जिससे जिसके पास भी पैसे हों वह अपने लिए सीट खरीद सकता है। इसमें निजी महाविद्यालय प्रबंधन की अपनी कसौटी...
महिला आरक्षणमहिलाओं को ग्राम पंचायत और नगर निगम चुनावों में 33% आरक्षण प्राप्त है। संसद और विधानसभाओं तक इस आरक्षण का विस्तार करने की एक दीर्घावधि योजना है। इसके अतिरिक्त, भारत में महिलाओं को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण या अधिमान्य व्यवहार मिलता है। कुछ पुरुषों का मानना है कि भारत में विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश...
महिला आरक्षण विधेयक 9 मार्च 2010 को 186 सदस्यों के बहुमत से राज्य सभा में पारित हुआ, इसके खिलाफ सिर्फ एक वोट पड़ा. अब यह लोक सभा में जायेगा और अगर यह वहां पारित हो गया तो इसे लागू किया जाएगा.
तमिलनाडु सरकार ने मुसलमानों और ईसाइयों प्रत्येक के लिए 3.5% सीटें आवंटित की हैं, जिससे ओबीसी आरक्षण 30% से 23% कर दिया गया, क्योंकि मुसलमानों या ईसाइयों से संबंधित अन्य पिछड़े वर्ग को इससे हटा दिया गया। सरकार की दलील है कि यह उप-कोटा धार्मिक समुदायों के पिछड़ेपन पर आधारित है न कि खुद धर्मों के आधार पर.
आंध्र प्रदेश प्रशासन ने मुसलमानों को 4% आरक्षण देने के लिए एक क़ानून बनाया। इसे अदालत में चुनौती दी गयी। केरल लोक सेवा आयोग ने मुसलमानों को 12% आरक्षण दे रखा है। धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के पास भी अपने विशेष धर्मों के लिए 50% आरक्षण है। केंद्र सरकार ने अनेक मुसलमान समुदायों को पिछड़े मुसलम...
कुछ अपवादों को छोड़कर, राज्य सरकार के अधीन सभी नौकरियां उस सरकार के तहत रहने वाले अधिवासियों के लिए आरक्षित होती हैं। पीईसी चंडीगढ़ में, पहले 80% सीट चंडीगढ़ के अधिवासियों के लिए आरक्षित थीं और अब यह 50% है।
जेआईपीएमईआर जैसे संस्थानों में स्नातकोत्तर सीट के लिए आरक्षण की नीति उनके लिए है, जिन्होंने जेआईपीएमईआर से एमबीबीएस पूरा किया है। में इसके 120 स्नातकोत्तर सीटों में से 33% सीट 40 पूर्वस्नातक छात्रों के लिए आरक्षित हुआ करती हैं
कुछ आरक्षण निम्नलिखित के लिए भी बने हैं:
End of preview.

No dataset card yet

Downloads last month
1,322